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Monday, January 23, 2012

रा- वन ....एक खोज


रा-वन ..........वैज्ञानिक परिकल्पनाओ पर आधारित बॉलीवुड मसाला फिल्म ,  एक्शन ,गीत संगीत ,गलेमर  से सजी  मनोरंजन से भर पूर फिल्म ,ये शायद एक सामान्य फिल्म समीक्षा  होगी पर मेरे  आधार पर इसकी समीक्षा थोड़ी और विस्तृत होगी .......देखा जाइये तो यह फिल्म एक पूरे कंप्यूटर गेम पर आधारित थी ....एक कंप्यूटर गेम जिसकी कोडिंग जीरो और वन के रूप (binary code ya machine code ) की जाती है जिसे कोई प्रोग्रामर या ड़ेवेलोपेर सामान्य मानव की भाषा में alphanumeric  शब्दावली में syntax के द्वारा कोड करता है .....ये कोड किस पर से इंसानी सर ज़मी पर लाखों कोशिकाओं के समूह या उतक संरचना ,माईटरोकानडेरिया में परिवर्तित हो कर एक असाधारण मानव बन जाती है हो सवयम प्रोग्रामर या ड़ेवेलोपेर के जान का दुश्मन और समाज के लिए घातक हो जाता है ..यहाँ तक की इस खलनायक रुपी प्रोग्रामिंग नष्ट करने के लिए एक दूसरी प्रोग्रामिंग के दवरा एक नायक भी तैयार  किया जाता है जो की न सिर्फ मनुष्य की तरह चलता फिरता है खाता है पीता है ...बल्कि नायिका के साथ नृत्य संगीत कालुफ्त भी  उठाता है (हाजमोला सर के बाद भी डकारें आ रही हैं )........जिस तरह से विज्ञानं अविष्कार कर रहा है उस आधार पर किसी भी चीज़ को असंभव कहना मुमकिन नही क्यूंकि शायद अकबर बीरबल के ज़माने में कोई उनसे ये कहता की ऐसा समय आएगा जब मनुष्य बिना किसी माध्यम के एक जगह से बैठे -२ दूसरी जगह बैठे मनुष्य से बात कर सकेंगे वो जिस अवस्था में हैं उसी अवस्था में व्यक्तिगत रूप में ,तो शायद उस इंसान को पागल ही करार दिया जाता ....इस आधार पर ये भी कहा जा सकता है कि हम दिखियी इसी लिए देते हैं क्यूंकि हमारे शरीर से टकराकर प्रकाश कि किरणे प्रवर्तित होती हैं और हम दीखते हैं ,यदि हमारा शरीर पारदर्शी हो जाये तो ये किरणे आर पर हो जाएँगी और शायद हम न दिखे (कृपया धयान दे ये मैंने कहीं पढ़ था इस पर कल से ही कोई प्रयोग प्रक्रिया आरम्भ न करे ..जनहित में नही समाज हित में जारी ..धन्यवाद )......यानि mr india भी संभव है ..फिर से चेतावनी ...गुड .....हम आते हैं फिर से रा - वन पर ......गेमिंग  वर्ल्ड कि पारी लोक जैसी दुनिया में दैत्यों कि संभावनो वाली यह फिल्म बच्चों को तो ३ डी के साथ पसंद ही था ......पर वयस्कों के लिए किसी प्रकार पाचक चूरन कि आवशयकता लगेगी ऐसा निदेशक को लगा इस लिए गीत संगीत के साथ फुल टू करीना कि अदाएं और एक जुबान पर चढ़ने वाला मस्त गीत भी दे दिया .....बिलकुल  फ्री ....मह्लिओं के लिए शाहरुख़ भइया हैं ही ......मेरे अनुसार यह औसत से अधिक पर बहुत अच्छी से थोडा यानि अच्छी फिल्म कि श्रेणी में आती है .....एक आखिर शिकायत छोटे बच्चों के मुख से कुछ अश्लील शब्दावली ,करीना कि ब्रांड न्यू  गालियाँ और कहीं कहीं अजीब से हसने कि कोशिश में डाले गए सीन ने फिल्म कि प्रभाविकता को कहीं न कहीं प्रभावित किया ..........अगर आप मुझ से पूछेंगे कि किस कलाकार ने मुझे सब से ज्यादा प्रभावित किया तो मेरा जवाब होगा ..बाल कलाकार अरमान वर्मा उर्फ़ प्रतीक सुब्रमन्यम ने ......उसके हियर  स्टाइल ने ,आँखों कि चमक ने व बहुत ही सहज अदाकारी ने मुझे प्रभावित किया ..............कुल मिला कर ये एक मसाला फिल्म है ......और सिनेमा घरों में जा कर पैसे खर्च कर देखि जाने वाली फिल्म है (क्षमा के साथ समयावधि पर कतई  भी धयान न दे जिस प्रकार से मैंने फिल्म का आधार गेमिंग परिकल्पना के जीवंत होने पर नही दिया  ) ....................भूल चुक ,किसी भी प्रकार कि त्रुटि के लिए क्षमा .........धन्यवाद

1 comment:

अभिषेक मिश्र said...

रा-वन के तकनिकी पक्ष पर अच्छी जानकारी दी है आपने.